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हर भारतीय परिवार के लिए सड़क सुरक्षा की 7 आदतें

2 मिनट में पढ़ें

ज़्यादातर सड़क हादसे लंबी यात्रा में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे सफ़र में होते हैं — स्कूल, बाज़ार या ऑफ़िस जाते हुए। कुछ छोटी आदतें बड़ा फ़र्क ला सकती हैं।

1. हेलमेट पहनें, पट्टा लगाएँ

हेलमेट तभी काम करता है जब वह सिर पर टिका रहे। दो मिनट के सफ़र में भी ठोड़ी का पट्टा ज़रूर लगाएँ। दोपहिया पर बैठे बच्चों के लिए भी सही साइज़ का अपना हेलमेट हो।

2. पीछे की सीट पर भी सीट बेल्ट

पीछे बैठे लोग अक्सर बेल्ट भूल जाते हैं। अचानक ब्रेक लगने पर बिना बेल्ट वाला व्यक्ति ख़ुद को और आगे बैठे लोगों को चोट पहुँचा सकता है। घर का नियम बनाएँ: "पहले बेल्ट, फिर गाड़ी चालू।"

3. फ़ोन दूर रखें

40 किमी/घंटा की रफ़्तार पर फ़ोन की एक झलक का मतलब है 10 मीटर से ज़्यादा बिना सड़क देखे चलना। ज़रूरी कॉल हो, तो पहले सुरक्षित जगह रुकें।

4. स्कूल, बाज़ार और चौराहों पर धीरे चलें

यहाँ बच्चे और पैदल लोग अचानक सामने आ जाते हैं। थोड़ा धीरे चलने में कुछ सेकंड ही लगते हैं।

5. इमरजेंसी नंबर पास रखें

घर के हर सदस्य के फ़ोन में 112 (हर इमरजेंसी) और 108 (एम्बुलेंस) सेव करें। नेशनल हाईवे पर 1033 से हाईवे मदद मिलती है। हमारा इमरजेंसी हेल्पलाइन पेज इन्हें एक टैप पर रखता है।

6. अजनबियों के लिए मदद करना आसान बनाएँ

अगर कभी एक्सीडेंट हो और आप बोल न पाएँ, तो सबसे पहले पहुँचने वालों को पता नहीं होगा कि आपका परिवार कौन है। गाड़ी पर सेफ्टी QR स्टिकर हो, तो कोई भी स्कैन करके लोकेशन के साथ आपके परिवार को खबर दे सकता है — आपका नंबर सबके सामने लिखे बिना।

7. घर पर इस बारे में बात करें

परिवार को बताएँ कि एक्सीडेंट की कॉल आए तो क्या करें: शांत रहें, जगह नोट करें, और अगर अभी तक मदद नहीं बुलाई गई तो 112 पर कॉल करें।


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